हम अज्ञानियों को तार दो, नमन स्वीकार करो हे! वाग्वादिनी। हम अज्ञानियों को तार दो, नमन स्वीकार करो हे! वाग्वादिनी।
आप हैं शांति का कानन धरा बंजर का कृन्दन है. आप हैं शांति का कानन धरा बंजर का कृन्दन है.
मैं तो जल की एक धारा था, मुझे नहीं था मालूम, किस तरह था मुझको बहना मैं तो जल की एक धारा था, मुझे नहीं था मालूम, किस तरह था मुझको बहना
कितना सुंदर रूप है हिंदी का सच में यही तो श्रृंगार है। कितना सुंदर रूप है हिंदी का सच में यही तो श्रृंगार है।
होता है महान निरोध परिणाम, गुरु आपको मेरा प्रतिप्रणाम। होता है महान निरोध परिणाम, गुरु आपको मेरा प्रतिप्रणाम।
शब्द भी कम पड़ जाते हैं, जब बात गुरूओं की आती है! शब्द भी कम पड़ जाते हैं, जब बात गुरूओं की आती है!